प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं: नीमच के गौरव राहुल लोहार ने कला के जरिए देश-दुनिया में बढ़ाया समाज का मान
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International book of record's holder rahul kumar lohar |
नीमच/रतलाम: "हुनर और जज्बा हो तो आसमान की ऊंचाइयों को छूना नामुमकिन नहीं।" इस बात को चरितार्थ कर दिखाया है नीमच जिले के छोटे से गांव कुचड़ोद के युवा प्रतिभाशाली चित्रकार राहुल देव लोहार ने। हाल ही में रतलाम में आयोजित एक भव्य समारोह में राहुल को उनकी उत्कृष्ट कला और सामाजिक सरोकारों के लिए विशिष्ट सम्मान से नवाजा गया, जहाँ उन्होंने प्रदेश के दिग्गज मंत्रियों और समाज के वरिष्ठजनों के बीच अपनी अमिट छाप छोड़ी।
कैबिनेट मंत्री की मौजूदगी में हुआ सम्मान
विश्वकर्मा दिवस के पावन अवसर पर मालवी लोहार समाज कल्याण विकास एवं उत्थान सेवा समिति द्वारा आयोजित इस गौरवशाली कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त श्री प्रेमनारायण विश्वकर्मा (अध्यक्ष, विश्वकर्मा कल्याण बोर्ड, म.प्र. शासन) उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री परमानंद विश्वकर्मा ने की। इस दौरान मंत्रियों और समाज के वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा राहुल को उनकी कलात्मक उपलब्धियों और 'डॉक्टरेट' की उपाधि प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
लोहार समाज का गौरव और 'वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड' का सफर
राहुल केवल एक चित्रकार ही नहीं, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणापुंज बन चुके हैं। उनकी उपलब्धियों की फेहरिस्त काफी लंबी है:
- अनोखा मास्क: कोरोना काल के दौरान राहुल ने एक ऐसा मास्क तैयार किया जिस पर विश्व के उन 40 डॉक्टर्स के चित्र उकेरे गए थे जिन्होंने मानवता की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इस कलाकृति को 'वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड' में स्थान मिला।
- कला भूषण पुरस्कार: इससे पूर्व महाराष्ट्र में उन्हें प्रतिष्ठित 'कला भूषण पुरस्कार' से भी सम्मानित किया जा चुका है।
- पुणे में सम्मान: ग्लोबल स्कॉलर्स फाउंडेशन द्वारा भी उन्हें कला और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सराहा गया है।
समाज सेवा का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान केवल सम्मान ही नहीं हुआ, बल्कि राहुल की उपस्थिति में समाज के युवाओं ने 36 यूनिट रक्तदान कर एक मिसाल पेश की। समाज के वरिष्ठों का कहना है कि राहुल जैसे प्रतिभाशाली युवक लोहार समाज की गौरव गाथा को नए आयाम दे रहे हैं। उनकी कला न केवल सुंदर है, बल्कि समाज को एक सकारात्मक संदेश भी देती है।
"प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती। राहुल जी की मेहनत और उनकी कला के प्रति समर्पण ने आज नीमच जिले और पूरे लोहार समाज का नाम पूरे देश में गौरवान्वित किया है।"

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