"कला के प्रति समर्पण: गोंड संस्कृति से प्रभावित होकर राहुल ने बनाए शुद्ध प्राकृतिक रंगों से चित्र"
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| गोंड़ आर्ट वर्क - राहुल लोहार |
राहुल कुमार लोहार एक खोजी कलाकार हैं, जिनकी कला का आधार मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध गोंड जनजातीय चित्रकला के प्रति उनका गहरा लगाव और सम्मान है। राहुल स्वयं को इस विधा का पारंगत विशेषज्ञ नहीं मानते, बल्कि एक ऐसे विद्यार्थी के रूप में देखते हैं जो इस प्राचीन कला की बारीकियों को सीखने और उसे अपने नजरिए से दीवारों पर उतारने का प्रयास कर रहे हैं।
प्रेरणा और प्रभाव
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| गोंड़ चित्रकारी राहुल देव लोहार |
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| Gond artist rahul kumar lohar |
राहुल का यह कार्य गोंड जनजाति की जीवनशैली और उनके अनूठे कला-रूपों से गहराई से प्रभावित है:
सीखने की प्रक्रिया: गोंड चित्रों की जटिलता और उनके पीछे छिपी कहानियों से प्रभावित होकर, राहुल ने उन्हीं पारंपरिक बारीकियों—जैसे महीन बिंदु (Dots) और रेखाओं (Lines)—को अपने चित्रों में ढालने की कोशिश की है!
जनजातीय संवेदना: गोंड समुदाय जिस तरह प्रकृति और पशु-पक्षियों को अपनी कला में मुख्य स्थान देता है, राहुल ने भी उसी भाव को अपनी कला का केंद्र बनाया है। यह चित्र उसी आदर भाव का एक परिणाम है।
परंपरा और तकनीक का सम्मान
अपनी इस कला यात्रा में राहुल ने शुद्ध प्राकृतिक रंगों के पारंपरिक महत्व को बनाए रखने का प्रयास किया है:
प्रकृति से जुड़ाव: उन्होंने बाजार के सिंथेटिक रंगों के बजाय, पुरानी परंपरा का अनुसरण करते हुए जंगलों से लाए गए फूलों, पीली मिट्टी (गेरू), कोयले और चूना पत्थर को पीसकर खुद रंग तैयार किए हैं।
मिट्टी की महक: यह प्रयास न केवल कला को जीवंत बनाता है, बल्कि उन ग्रामीण महिलाओं और पुरुषों की मेहनत को भी नमन करता है जो पीढ़ियों से अपने हाथों से रंग बनाकर घरों की दीवारों को सजाते आए हैं।
कलाकार का संदेश
"मैं गोंड कला का विशेषज्ञ तो नहीं हूँ, लेकिन इस महान संस्कृति की सुंदरता और इसकी बारीकियों ने मुझे इतना प्रभावित किया कि मैंने इसे अपने भावों के माध्यम से दीवार पर उकेरने का एक छोटा सा प्रयास किया है। मेरा यह कार्य उसी समृद्ध परंपरा के प्रति मेरी एक भेंट है।" — राहुल कुमार लोहार



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